एक क्लिक आपकी ब्रांच और शहर तय कर सकता है। कर्नाटक एग्ज़ामिनेशंस अथॉरिटी (KEA) ने KCET 2025 की काउंसलिंग का ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सक्रिय कर दिया है और ऑप्शन एंट्री विंडो चल रही है। Round 2 का मॉक सीट अलॉटमेंट 29 अगस्त 2025 तक जारी है, यानी उम्मीदवार अभी अपनी प्राथमिकताओं को सुधारने का मौका रख रहे हैं। Round 2 की सीट मैट्रिक्स 21 अगस्त को जारी हुई, और फाइनल अलॉटमेंट सितंबर की शुरुआत में अपेक्षित है। इससे पहले Round 1 में 18 जुलाई तक ऑप्शन एंट्री, 21 जुलाई को मॉक डिस्प्ले और 28 जुलाई को रियल अलॉटमेंट हुआ था। चुनी गई सीटें सुरक्षित रखने के लिए फीस भुगतान और कॉलेज रिपोर्टिंग तय समय पर करनी होगी।
यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है—रजिस्ट्रेशन, ऑप्शन एंट्री, मॉक अलॉटमेंट, रियल अलॉटमेंट, एडमिशन ऑर्डर डाउनलोड और कॉलेज रिपोर्टिंग—सभी चरण समयबद्ध हैं। जिनका दस्तावेज़ सत्यापन मान्य है, वे अभी लॉगिन करके अपनी पसंद की कॉलेज-कोर्स सूची को एडिट, री-ऑर्डर या लॉक कर सकते हैं। जो पहली बार शामिल हो रहे हैं, उन्हें पहले दस्तावेज़ सत्यापन पूरा करना होगा और फिर ऑप्शन एंट्री में जाना होगा।
Round 1 में ऑप्शन एंट्री की डेडलाइन 18 जुलाई थी। 21 जुलाई को मॉक सीट अलॉटमेंट के जरिए उम्मीदवारों को यह संकेत मिला कि उनकी प्राथमिकताएँ और रैंक के हिसाब से कौन-सी सीट संभावित है। 28 जुलाई को रियल अलॉटमेंट जारी हुआ। Choice-1 उम्मीदवारों के लिए 3 से 8 अगस्त के बीच फीस भुगतान की खिड़की खुली और 9 अगस्त को रिपोर्टिंग निर्धारित थी।
अब फोकस Round 2 पर है। 21 अगस्त को सीट मैट्रिक्स अपडेट हुई—यानि किस कॉलेज में किस ब्रांच के कितने सीट उपलब्ध हैं—और 29 अगस्त तक मॉक अलॉटमेंट के जरिए छात्रों को फिर से अपनी लिस्ट सुधारने का मौका मिला है। मॉक अलॉटमेंट सिर्फ संकेत देता है; वास्तविक सीट इससे अलग हो सकती है। इसलिए मॉक के बाद अपनी सूची को रिव्यू करें, री-ऑर्डर करें और गैर-जरूरी विकल्प हटाएँ।
Round 2 के फाइनल अलॉटमेंट के बाद वही पुरानी समयरेखा लागू होती है—फीस भुगतान, एडमिशन ऑर्डर डाउनलोड और कॉलेज रिपोर्टिंग। जिन उम्मीदवारों को पसंद का कॉलेज-कोर्स अभी नहीं मिला है, उनके लिए सितंबर-अक्टूबर में निर्धारित एक्सटेंडेड राउंड्स अतिरिक्त अवसर देंगे।
सीट अलॉटमेंट का नियम साफ है—आपका KCET रैंक, आपकी ऑप्शन एंट्री की प्राथमिकताएँ, सीट मैट्रिक्स और कैटेगरी-वार आरक्षण—इन चारों के आधार पर सीट तय होती है। इसलिए जितनी समझदारी से आप अपनी लिस्ट बनाते हैं, उतने अच्छे मौके बनते हैं।
काउंसलिंग सिर्फ इंजीनियरिंग तक सीमित नहीं है; संबंधित कोर्स (जैसे आर्किटेक्चर के लिए NATA/पेपर्स-2 की योग्यता के साथ), फार्मेसी या एग्री/एलाइड डिसिप्लिन में भी सीटें भागीदारी के अंतर्गत आती हैं, बशर्ते आप पात्रता और दस्तावेज़ शर्तें पूरी करते हों।
काउंसलिंग के चरणों को सरल भाषा में समझें:
Choice क्या है? यह आपका अगला कदम तय करता है:
दस्तावेज़ चेकलिस्ट—मूल और फोटोकॉपी साथ रखें:
ऑप्शन एंट्री को समझदारी से कैसे करें?
फीस और रिपोर्टिंग पर ध्यान दें। पेमेंट विंडो छोटी होती है—नेट बैंकिंग/कार्ड/UPI जैसे विकल्प मिलते हैं। पेमेंट सफल होने पर रसीद और एडमिशन ऑर्डर डाउनलोड करें। कॉलेज रिपोर्टिंग के समय सभी मूल दस्तावेज़, फोटो और प्रिंटआउट साथ रखें। देरी पर सीट रद्द हो सकती है, इसलिए तारीख और समय-पत्रक को कैलेंडर पर मार्क करें।
एक्सटेंडेड राउंड्स क्यों मायने रखते हैं? क्योंकि पहले राउंड्स में छोड़ी गई सीटें, अपग्रेडेशन से खाली हुई सीटें और कुछ नई जोड़ी गई सीटें अक्सर इन राउंड्स में आती हैं। सितंबर–अक्टूबर में प्रस्तावित दूसरा एक्सटेंडेड राउंड उन उम्मीदवारों के लिए अवसर है जिन्हें अब तक मनचाहा विकल्प नहीं मिला। प्रक्रिया वही रहती है—ऑप्शन एंट्री, प्रोविजनल अलॉटमेंट, फाइनल अलॉटमेंट, फीस और रिपोर्टिंग।
आरक्षण और मेरिट की बारीकियाँ: अलॉटमेंट जनरल/कैटेगरी सीटों, होम यूनिवर्सिटी और नॉन-होम यूनिवर्सिटी, महिला/स्पेशल कैटेगरी जैसी शर्तों के साथ होता है। अगर कोई प्रमाणपत्र मान्य नहीं है या समय पर अपलोड/दाखिल नहीं हुआ है, तो सिस्टम आपको जनरल सीटों तक सीमित कर सकता है। इसलिए दस्तावेज़ वैधता पर पहले ही चेक कर लें।
आम गलतियाँ जिनसे बचना चाहिए:
क्या इस समय आप क्या करें? यदि आपके दस्तावेज़ सत्यापित हैं, तो तुरंत सीट मैट्रिक्स देखकर अपनी ऑप्शन एंट्री को अपडेट करें, मॉक अलॉटमेंट के आधार पर क्रम सुधारें और फाइनल अलॉटमेंट से पहले लिस्ट लॉक कर दें। अलॉटमेंट आने के बाद Choice सही चुनें—अगर सीट आपकी प्राथमिकता के टॉप टियर में है तो Choice-1 सुरक्षित है; अपग्रेडेशन चाहते हैं तो Choice-2 समझदारी हो सकती है। फीस समय पर भरें और कॉलेज रिपोर्टिंग की तैयारी अभी से शुरू कर दें।
जो उम्मीदवार पहली बार पोर्टल में आ रहे हैं, वे पहले सत्यापन/रजिस्ट्रेशन की स्थिति जांच लें। जिनका आरक्षण/स्पेशल कोटा लागू है, वे मूल प्रमाणपत्र लेकर रखें—किसी एक कागज़ की कमी पूरी प्रक्रिया को पीछे धकेल सकती है। हेल्पलाइन/सपोर्ट से स्पष्टीकरण लें, और अनौपचारिक सूत्रों के बजाय आधिकारिक निर्देशों को ही आधार बनाएं।
एक आखिरी बात—KCET 2025 counselling एक सतत प्रक्रिया है, इसमें आपकी प्राथमिकताओं का हर छोटा बदलाव भी नतीजे बदल सकता है। इसलिए हर नोटिफिकेशन पर नजर रखें, समयसीमाएँ कैलेंडर में सेट करें और निर्णय डेटा देखकर लें—सीट मैट्रिक्स, पिछले राउंड की अलॉटमेंट ट्रेंड्स और अपनी प्राथमिकताओं के संतुलन के साथ।