जापानी सीरीज 'शोगुन' की एमी अवार्ड्स में ऐतिहासिक जीत
रविवार का दिन जापान के लिए एक नई उपलब्धि ले कर आया जब चर्चित सीरीज 'शोगुन' ने एमी अवार्ड्स में रिकॉर्डतोड़ जीत हासिल की। यह सीरीज, जेम्स क्लावेल के प्रसिद्ध उपन्यास पर आधारित है, जिसने 18 पुरस्कार जीतकर न केवल अपनी उत्कृष्टता का परिचय दिया, बल्कि यह पहली नॉन-इंग्लिश धारावाहिक बन गई जो बेस्ट ड्रामा सीरीज के अवार्ड से नवाजी गई।
इस सीरीज का प्रमुख पात्र Lord Toranaga है, जिसे हिरोयुकी सनाडा ने बखूबी निभाया। सनाडा को भी इस सीरीज के लिए व्यक्तिगत रूप से तारीफें मिलीं और वे पहले जापानी अभिनेता बने जिन्होंने एमी अवार्ड जीता। Lady Mariko की भूमिका अन्ना सवाई ने निभाई और उन्हें भी उनकी शानदार परफॉरमेंस के लिए पुरस्कार मिला।
स्वाभाविकता और सुंदरता से भरी कहानी
शोगुन की इस नयी प्रस्तुति में दर्शकों को एक मिश्रित अनुभव प्राप्त हुआ। पहले 1980 के version में अधिकतर कहानी John Blackthorne के दृष्टिकोण से प्रस्तुत की गयी थी, पर इस बार की कहानी जापानी भाषा में प्रस्तुत की गई है। इससे न केवल पश्चिमी सिनेमा में जापान की पारंपरिक छवि से हटकर नयी छवि पेश की गयी, बल्कि भाषाई स्वाभाविकता भी बनी रही।
पारंपरिक संस्कृति और ऐतिहासिक महत्व
सीरीज की अधिकतर शूटिंग कनाडा में की गई है, फिर भी इसमें जापानी संस्कृति और इतिहास को सजीव बनाने का पूरा प्रयास किया गया है। इस दिशा में, जापान के कई विशेषज्ञ, जैसे कि विशेष विग तकनीशियनों ने भी योगदान दिया। इससे सीरीज को एक प्रामाणिक स्वरूप प्राप्त हुआ है।
ओसाका कैसल, जो कि इस सीरीज में महत्वपूर्ण स्थान रखता है, वहां पर घूमने आये पर्यटकों ने भी इस जीत का जश्न मनाया। लंदन से आये पर्यटक ज़रा फ़र्ज़ानी ने इसे इस साल की सबसे बेहतरीन सीरीज बताया और अपने विचार व्यक्त करते हुए सीरीज की उत्कृष्ट निर्देशन तथा सांस्कृतिक प्रशंसा की।
संपूर्ण जापान में खुशी की लहर
इस सीरीज की सफलता ने न केवल दर्शकों के दिलों को जीता है, बल्कि जापानी फिल्म उद्योग को भी गर्व महसूस कराया है। इस सीरीज का ट्रेलर देखने वाले युसुक ताकिजावा ने भी शो की गुणवत्ता, उत्साही प्रदर्शन, और फिल्मिंग तकनीक की प्रशंसा की।
इस जीत की चर्चाएं पूरे देश में हो रही हैं। निर्देशक शिनिचीरो उएदा और वीडियो गेम निर्माता हिदेओ कोजिमा ने भी अपनी खुशी व्यक्त की। सनाडा के स्वीकृति भाषण ने सोशल मीडिया पर धूम मचा दी और 'historic achievements' तथा 'Hiroyuki Sanada' ट्रेंडिंग विषय बन गए।
कियोकि कंडा, जो 70 वर्ष की एक पेंशनर हैं, ने इस अवार्ड से बहुत खुश होकर अपनी प्रतिक्रया दी। उन्होंने सनाडा की 2003 में 'लास्ट समुराई' के बाद लॉस एंजिल्स शिफ्ट होने की कड़ी मेहनत का उल्लेख किया। हालांकि उन्होंने सीरीज नहीं देखी, लेकिन वे इस जीत से रोमांचित थीं।
अंत में, 'शोगुन' की यह ऐतिहासिक जीत जापानी टेलीविजन उद्योग के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित हुई है और पूरी दुनिया ने इसके सांस्कृतिक और ऐतिहासिक प्रस्तुति की सराहना की है।
LOKESH GURUNG
18 सितंबर, 2024 - 03:07 पूर्वाह्न
अरे भाई ये शोगुन तो बस जबरदस्त था! 🤯 जापानी भाषा में ये इतना शानदार कैसे बन गया? मैंने तो सिर्फ़ ट्रेलर देखा था, पर अब पूरा सीरीज डाउनलोड कर लिया! हिरोयुकी सनाडा तो देवता हैं, इनकी आँखों में पूरा जापान बस गया! 😭🔥
Aila Bandagi
19 सितंबर, 2024 - 16:31 अपराह्न
वाह! ये जीत सिर्फ़ एक शो की नहीं, पूरे जापान की जीत है! 🌸 मैंने अभी तक नहीं देखा, लेकिन अब जरूर देखूंगी। ये लोग अपनी संस्कृति को इतना सुंदर दिखा रहे हैं, दिल भर गया। 🙏❤️
Abhishek gautam
20 सितंबर, 2024 - 08:52 पूर्वाह्न
देखो, ये सब बस एक अल्पकालिक कलात्मक उत्साह है। वास्तविकता ये है कि पश्चिमी दुनिया कभी भी गहराई से एशियाई नैरेटिव को समझ नहीं पाती। शोगुन की सफलता तो एक अंग्रेजी-केंद्रित अलगाव की विफलता है, जिसे वे अपने अहंकार के लिए नाटकीय रूप से फैला रहे हैं। हिरोयुकी सनाडा का अभिनय निश्चित रूप से शानदार है, लेकिन ये सब एक अंतरराष्ट्रीय प्रचार अभियान है जो जापानी भाषा के उपयोग को 'अनोखा' बनाकर उसे एक उपभोग्य वस्तु में बदल रहा है। इस तरह की 'प्रामाणिकता' का निर्माण तो बस एक नए प्रकार के औपनिवेशिक दृष्टिकोण का उदाहरण है।
Imran khan
22 सितंबर, 2024 - 08:23 पूर्वाह्न
मैंने शोगुन देखा है। बस एक बात कहूं - ये शो आपके दिमाग को बदल देता है। निर्माण की शुद्धता, आवाज़ का अंदाज़, ये सब इतना वास्तविक है कि लगता है जैसे आप 1600 के जापान में खड़े हों। और हां, एमी अवार्ड्स बस एक ट्रॉफी है... लेकिन जब एक नॉन-इंग्लिश शो इतना गहरा छू जाए, तो वो ट्रॉफी बस एक फॉर्मैलिटी हो जाती है। बहुत बढ़िया काम किया है।
Neelam Dadhwal
23 सितंबर, 2024 - 08:37 पूर्वाह्न
ये सब बस एक बड़ा धोखा है। जापानी भाषा में बनाया गया? हां, लेकिन क्या आपने देखा कि इसकी पूरी फिल्मांकन तकनीक, कैमरा वर्क, और एडिटिंग पश्चिमी स्टूडियो की है? ये जापानी संस्कृति का सम्मान नहीं, बल्कि एक ब्रांडेड एक्सोटिक फैशन है। और जो लोग इसे 'प्रामाणिक' बता रहे हैं, वो बस अपनी अज्ञानता को बढ़ा रहे हैं। अगर ये जापानी निर्माताओं की ओर से बना होता, तो शायद इसकी कहानी अलग होती।