बायोसेक्योर एक्ट – एक व्यापक परिचय

जब हम बायोसेक्योर एक्ट, भारत में व्यक्तिगत जानकारी के संग्रह, भंडारण और उपयोग को नियंत्रित करने वाला प्रमुख कानून, बायोसेक्योर एक्ट 2023 की बात करते हैं, तो अक्सर डेटा प्राइवेसी, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और डेटा सुरक्षा आयोग जैसे शब्द सुनाई देते हैं। ये सभी घटक एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और एक समग्र सुरक्षा ढांचा बनाते हैं। बायोसेक्योर एक्ट का लक्ष्य व्यक्तिगत डेटा के दुरुपयोग को रोकना और नागरिकों को उनके डेटा पर नियंत्रण देना है।

इस नियम में डेटा प्राइवेसी, व्यक्तिगत सूचना की गोपनीयता और उसके अनुचित उपयोग को रोकने के मानक को एक मौलिक अधिकार माना गया है। इसी के तहत सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, डिजिटल सेवाओं और इलेक्ट्रॉनिक लेन‑देन को नियंत्रित करने वाला विधिक ढांचा को भी बायोसेक्योर एक्ट के परिप्रेक्ष्य में अद्यतन किया गया है, ताकि दोनों के बीच तालमेल बना रहे। साथ ही, डेटा सुरक्षा आयोग, डेटा संरक्षण के अनुपालन की निगरानी, शिकायत निपटारा और दंडात्मक कार्रवाई करने वाला स्वायत्त निकाय इस एक्ट की निगरानी में प्रमुख भूमिका निभाता है।

मुख्य प्रावधान और व्यावहारिक प्रभाव

बायोसेक्योर एक्ट के तहत तीन महत्वपूर्ण सिद्धांत सामने आते हैं: (1) डेटा संग्रह के लिये स्पष्ट सहमति, (2) न्यूनतम डेटा सिद्धांत – केवल आवश्यक जानकारी ही एकत्रित की जाए, और (3) डेटा भंडारण की समय सीमा – असावधानी से डेटा को अनावश्यक रूप से रखे न रखा जाए। इन सिद्धांतों का प्रत्यक्ष प्रभाव कंपनियों की गोपनीयता नीतियों और उपयोगकर्ता अनुबंधों में दिखता है। उदाहरण के तौर पर, एक ई‑कॉमर्स साइट को अब हर ग्राहक से व्यक्तिगत पहचान‑सूचना (PII) एकत्र करने से पहले स्पष्ट सहमति लेनी होगी, और यदि ग्राहक अपनी इंटरैक्शन समाप्त करता है तो डेटा को सुरक्षित रूप से हटाना पड़ेगा।

डेटा सुरक्षा आयोग इस प्रक्रिया की जाँच करता है और गैर‑अनुपालन मामलों में आर्थिक दंड, या जब बड़े उल्लंघन होते हैं तो संचालन लाइसेंस रद्द करने का विकल्प भी रखता है। इस कारण कई संगठनों ने अपने आंतरिक डेटा गवर्नेंस फ्रेमवर्क को पुनः व्यवस्थित किया है – जैसे डेटा एन्क्रिप्शन को अनिवार्य बनाना, नियमित ऑडिट करना और डेटा अभिगमन लॉग को मॉनिटर करना।

आपको अगर बायोसेक्योर एक्ट के नवीनतम संशोधनों, प्रमुख न्यायिक फैसलों या व्यावहारिक अनुपालन कदमों की खोज है, तो नीचे दिए गए लेखों में हर पहलू को समझाया गया है। यहाँ आप देखेंगे कि विभिन्न उद्योगों में इस कानून को अपनाने के सफलता के किस्से, आम चुनौतियों के समाधान और नियामक अपडेट्स क्या हैं। यह संग्रह आपको वकीलों, स्टार्ट‑अप्स, बड़े उद्यमों और आम नागरिकों सभी को समझने में मदद करेगा कि डिजिटल युग में व्यक्तिगत डेटा को सुरक्षित रखना कितना ज़रूरी है।

बैंकिंग, आईटी व फ़ार्मा शेयरों के उछाल से भारतीय शेयर बाजार ने 11 अक्टूबर को किया सकारात्मक क्लोज़

RBI की स्थिर दर, SBI में निजी‑क्षेत्री सुधार और US के Biosecure Act से फ़ार्मा उछाल ने 11 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार को सकारात्मक क्लोज़ दिलाया।

आगे पढ़ें