दिग्गज अभिनेता कोटा श्रीनिवासा राव का निधन, 82 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

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दिग्गज अभिनेता कोटा श्रीनिवासा राव का निधन, 82 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस

भारतीय सिनेमा और राजनीति के एक युग का अंत हो गया है। तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज अभिनेता और पूर्व राजनीतिज्ञ कोटा श्रीनिवासा राव का 13 जुलाई 2025 को 82 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उन्होंने सिर्फ अभिनय ही नहीं किया, बल्कि अपनी राजनीतिक सूझबूझ से समाज में भी अपनी पहचान बनाई। उनके जाने से दक्षिण भारतीय फिल्म जगत में एक ऐसा खालीपन आ गया है, जिसे भरना नामुमकिन होगा।

यहाँ एक दिलचस्प बात यह है कि राव साहब केवल एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि वे एक ऐसे कलाकार थे जिन्होंने नकारात्मक भूमिकाओं को भी गरिमा प्रदान की। उन्होंने अपनी कला को सिर्फ पर्दे तक सीमित नहीं रखा, बल्कि आंध्र प्रदेश की राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

सिनेमाई सफर और अभिनय की विविधता

कोटा श्रीनिवासा राव का सफर थिएटर से शुरू हुआ था, और वहीं से उन्होंने अपनी अभिनय की बारीकियों को सीखा। हालांकि वे मुख्य रूप से तेलुगु सिनेमा के चेहरे रहे, लेकिन उन्होंने तमिल, हिंदी, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों में भी अपनी छाप छोड़ी। उनके काम करने का तरीका ऐसा था कि दर्शक उन्हें देखते ही कहानी में खो जाते थे। (सच कहें तो, उनकी कॉमिक टाइमिंग और विलेन वाले अंदाज का कोई मुकाबला नहीं था)।

अगर हम उनके करियर की बात करें, तो साल 1987 उनके लिए सोने जैसा साल रहा। उस एक साल में उन्होंने इतनी फिल्में कीं कि कोई गिन भी नहीं सकता। 'मरणा होमम', 'दयामयूडु', 'रौडी बाबई' और 'श्री कनका मालाक्ष्मी रिकॉर्डिंग डांस ट्रूप' जैसी फिल्मों में उनकी मौजूदगी ने उन्हें सुपरस्टार बना दिया। दिलचस्प बात यह है कि 'मण्डलादीसूडु' में उनके द्वारा निभाए गए 'भीमा राव' के किरदार ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई।

उनके करियर की गहराई का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 2023 तक सक्रिय रूप से काम किया। फिल्म 'सुवर्ण सुंदरी' में एक पुजारी की भूमिका निभाकर उन्होंने साबित कर दिया कि उम्र केवल एक संख्या है और अभिनय उनके खून में है।

राजनीति में प्रवेश और जनसेवा

अभिनय की दुनिया से निकलकर उन्होंने राजनीति के मैदान में भी अपनी किस्मत आजमाई। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के टिकट पर वे चुनाव मैदान में उतरे और 1999 से 2004 तक विजयवाड़ा ईस्ट निर्वाचन क्षेत्र से विधायक (MLA) रहे।

पांच साल के इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने राजनीति को सिर्फ सत्ता का जरिया नहीं बनाया, बल्कि जनता की समस्याओं को सदन में उठाने का प्रयास किया। राजनीति और सिनेमा का यह संगम कम ही लोगों में देखने को मिलता है, लेकिन राव साहब ने दोनों क्षेत्रों में संतुलन बनाए रखा।

सम्मान और पारिवारिक जीवन

सम्मान और पारिवारिक जीवन

कला के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए, भारत सरकार ने उन्हें 2015 में पद्म श्री से सम्मानित किया, जो भारत का चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है। यह सम्मान उनकी दशकों की मेहनत और सिनेमाई योगदान की एक आधिकारिक मान्यता थी।

निजी जीवन की बात करें तो, 1965 में उन्होंने रुक्मणी से विवाह किया था। 60 वर्षों तक चले इस वैवाहिक सफर ने यह दिखाया कि वे जितने सफल कलाकार थे, उतने ही समर्पित पारिवारिक व्यक्ति भी। उनके और रुक्मणी के बीच का यह अटूट बंधन वाकई प्रेरणादायक है।

अंतिम विदाई और 'हरि हरा वीर मल्लू'

किस्मत का खेल देखिए, उनकी अंतिम फिल्म हरि हरा वीर मल्लू भारत उनके निधन के बाद 2025 में रिलीज हुई। इस फिल्म में उन्होंने 'पेड्डा डोरा' का किरदार निभाया है। यह एक मरणोपरांत रिलीज (Posthumous release) है, जिसने प्रशंसकों की आँखों में आँसू ला दिए। फिल्म में पवन कल्याण और बॉबी देओल जैसे सितारों के साथ उनकी मौजूदगी एक आखिरी यादगार तोहफे की तरह है।

मुख्य तथ्य एक नजर में

  • जन्म: 10 जुलाई 1942
  • निधन: 13 जुलाई 2025
  • कुल राजनीतिक कार्यकाल: 5 वर्ष (1999-2004)
  • सबसे सफल वर्ष: 1987 (अत्यधिक फिल्में)
  • प्रमुख सम्मान: पद्म श्री (2015)
विरासत और प्रभाव

विरासत और प्रभाव

कोटा श्रीनिवासा राव ने आने वाली पीढ़ियों के अभिनेताओं के लिए एक मिसाल कायम की है। उन्होंने सिखाया कि एक अभिनेता को केवल नायक बनने की जरूरत नहीं है; एक बेहतरीन सहायक या खलनायक बनकर भी वह पूरी फिल्म पर राज कर सकता है। उनके जाने से तेलुगु सिनेमा ने अपना एक ऐसा स्तंभ खो दिया है, जिसने सिनेमा की भाषा को बदला।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोटा श्रीनिवासा राव का राजनीतिक करियर कैसा रहा?

वे 1999 से 2004 तक आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा ईस्ट निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा (BJP) के विधायक रहे। उन्होंने पांच साल तक सक्रिय रूप से जनसेवा की और राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बनाई।

उनकी अंतिम फिल्म कौन सी थी और उसमें उनका किरदार क्या था?

उनकी अंतिम फिल्म 'हरि हरा वीर मल्लू' थी, जो 2025 में उनके निधन के बाद रिलीज हुई। इस फिल्म में उन्होंने 'पेड्डा डोरा' नामक किरदार निभाया था, जो उनकी अंतिम यादगार भूमिका बन गई।

उन्हें कौन से प्रमुख सम्मान मिले?

भारतीय सिनेमा और रंगमंच में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें 2015 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया था, जो देश का चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है।

क्या वे केवल तेलुगु फिल्मों में काम करते थे?

नहीं, हालांकि वे मुख्य रूप से तेलुगु सिनेमा के लिए जाने जाते थे, लेकिन उन्होंने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन तमिल, हिंदी, कन्नड़ और मलयालम फिल्म उद्योगों में भी किया था।

18 टिप्पणि

Prathamesh Shrikhande

Prathamesh Shrikhande

5 अप्रैल, 2026 - 05:07 पूर्वाह्न

बहुत दुखद खबर है 😭
उनका अभिनय वाकई लाजवाब था और उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।

Priyank Prakash

Priyank Prakash

7 अप्रैल, 2026 - 01:08 पूर्वाह्न

हे भगवान! यह कैसे हो गया? 😱
पूरी इंडस्ट्री में शोक की लहर है, एकदम शॉकिंग! :-(

shrishti bharuka

shrishti bharuka

7 अप्रैल, 2026 - 13:03 अपराह्न

वाह, सिनेमा और राजनीति दोनों में हाथ आजमाना वाकई बहुत बहादुरी का काम है, अगर आप वास्तव में इसे कर सकें।

Senthilkumar Vedagiri

Senthilkumar Vedagiri

7 अप्रैल, 2026 - 16:12 अपराह्न

ये सब तारीखें कुछ अजीब नहीं लग रहीं? 2025 का समय है और अचानक ऐसी खबरें आ रही है.. मुझे तो लगता है कि इसके पीछे कुछ बड़ा खेल चल रहा है जो हम देख नहीं पा रहे h.. सब सेट किया हुआ है!

saravanan saran

saravanan saran

9 अप्रैल, 2026 - 14:48 अपराह्न

कलाकार कभी मरता नहीं, उसकी कृतियाँ उसे हमेशा जीवित रखती हैं। उन्होंने जिस तरह से नकारात्मक भूमिकाओं को एक नई गरिमा दी, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सबक है। शांति मिले उनकी आत्मा को।

SAURABH PATHAK

SAURABH PATHAK

11 अप्रैल, 2026 - 01:15 पूर्वाह्न

भाई, सबको पता है कि 1987 वाला साल उनका पीक था, उस समय उनकी फिल्मों की डिमांड इतनी थी कि वो एक साथ दस प्रोजेक्ट्स कर लेते थे। वैसे भी तेलुगु सिनेमा में उनके जैसा विलेन मिलना मुश्किल है।

Arun Prasath

Arun Prasath

11 अप्रैल, 2026 - 07:35 पूर्वाह्न

उनके राजनीतिक योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विजयवाड़ा ईस्ट से विधायक के रूप में उन्होंने प्रशासनिक सुधारों के लिए काफी प्रयास किए थे।

Priya Menon

Priya Menon

11 अप्रैल, 2026 - 13:11 अपराह्न

सिनेमा की दुनिया में ऐसे लोग कम ही होते हैं जो अपनी निजी जिंदगी और प्रोफेशनल लाइफ को इतनी खूबसूरती से बैलेंस कर पाएं।

Nikita Roy

Nikita Roy

12 अप्रैल, 2026 - 13:09 अपराह्न

बहुत महान कलाकार थे

Jivika Mahal

Jivika Mahal

12 अप्रैल, 2026 - 21:58 अपराह्न

कितनी सुंदर बात है कि उन्होंने अपनी पत्नी के साथ 60 साल बिताए! आज के दौर में ये देखना बहुत मुश्किल है और बहुत प्रेरणादायक भी है.. सच्ची मोहब्बत इसी को कहते है

Kartik Shetty

Kartik Shetty

13 अप्रैल, 2026 - 04:51 पूर्वाह्न

अभिनय की बारीकियों को समझना हर किसी के बस की बात नहीं होती और राव साहब ने इसे सिद्ध किया था

vipul gangwar

vipul gangwar

14 अप्रैल, 2026 - 21:32 अपराह्न

उनकी आखिरी फिल्म 'हरि हरा वीर मल्लू' देखना एक इमोशनल एक्सपीरियंस होगा। यह देखना दिलचस्प है कि कैसे एक कलाकार अपनी आखिरी सांस तक काम करता रहा।

Sharath Narla

Sharath Narla

15 अप्रैल, 2026 - 21:51 अपराह्न

राजनीति में जाना और फिर वापस सिनेमा की चमक में रहना, जीवन का एक पूरा चक्र पूरा कर लिया उन्होंने। वैसे भी दुनिया एक रंगमंच ही तो है।

Anil Kapoor

Anil Kapoor

17 अप्रैल, 2026 - 02:29 पूर्वाह्न

सिर्फ पद्म श्री मिलने से कोई महान नहीं हो जाता, असल महानता उनके काम में होनी चाहिए। हालांकि लोग उन्हें बहुत पसंद करते थे, पर मुझे लगता है कि उनके कुछ किरदारों में ओवरएक्टिंग थी।

Pradeep Maurya

Pradeep Maurya

18 अप्रैल, 2026 - 11:34 पूर्वाह्न

दक्षिण भारतीय सिनेमा ने हमेशा से ही भारतीय सिनेमा को एक नई दिशा दी है और कोटा श्रीनिवासा राव जैसे दिग्गजों ने अपनी मेहनत से इसे वैश्विक स्तर पर पहुँचाया है। उनका थिएटर से सिनेमा तक का सफर यह बताता है कि यदि इंसान में लगन हो तो वह किसी भी मुकाम को हासिल कर सकता है, चाहे वह राजनीति हो या अभिनय। उनकी बहुमुखी प्रतिभा ही उन्हें दूसरों से अलग बनाती थी और उनके द्वारा निभाए गए किरदार आज भी दर्शकों के जेहन में ताज़ा हैं।

megha iyer

megha iyer

19 अप्रैल, 2026 - 03:39 पूर्वाह्न

मुझे लगता है कि उनकी सादगी ही उनकी सबसे बड़ी ताकत थी।

Paul Smith

Paul Smith

19 अप्रैल, 2026 - 23:58 अपराह्न

अरे यार ये तो बहुत बुरा हुआ! पर सोचो कि उन्होंने कितनी पीढ़ियों को प्रेरित किया होगा, खासकर उन लोगों को जो छोटे शहरों से आकर बड़े सपने देखते है और सोचते है कि क्या वो कभी सफल हो पाएंगे। उनका जीवन हमें सिखाता है कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता और अगर आप अपने काम के प्रति सच्चे हो तो दुनिया आपको सलाम करती है, ठीक वैसे ही जैसे उन्हें पद्म श्री मिला। हमें उनकी विरासत को आगे बढ़ाना चाहिए और नए कलाकारों को उनके काम से सीखना चाहिए ताकि सिनेमा की क्वालिटी और बेहतर हो सके और हम सबको ऐसे ही बेहतरीन कलाकार मिलते रहें जो पर्दे पर जान फूंक दें।

Santosh Sharma

Santosh Sharma

20 अप्रैल, 2026 - 12:37 अपराह्न

सही कहा आपने, उनकी मेहनत वाकई काबिले तारीफ थी और वो सबके लिए एक प्रेरणा हैं

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